Monday, 31 December 2012

भांग बचाए जान

   

                                    भांग बचाए जान 


भांग में पाया जाने वाला एक तत्व'कैनाबिडिओल'
कैंसर के कई प्रकारों को फैलने से रोक सकता है. एक नये अध्ययन में यह दावा किया गया है.

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि भांग में पाए जाने वाले'कैनाबिडिओल'नामक तत्व में स्तन कैंसर के प्रसार के लिए जिम्मेदार जीन को निष्क्रिय कर देने की क्षमता होती है.
डेली मेल की खबर के अनुसार, इस तत्व की खास बात यह है कि यह भांग के पौधे के उन गुणों की उत्पत्ति नहीं करता जिनसे दिमाग अति सक्रिय होता है.
सैन फ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया पैसेफिक मेडिकल सेंटर के शोधकर्ता दल ने इस तत्व के गुणों का पांच साल पहले पता लगा लिया था. तब इसने प्रयोगशाला में मनुष्यो में स्तन कैंसर उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं के प्रसार को रोक दिया था.
अध्ययनकर्ता डॉक्टर शॉन मैकएलिस्टर ने कहा, ‘क्लीनिकल जांच से पहले जुटाए गए आंकड़े बहुत पुख्ता हैं और इनसे पता चला है कि कैनाबिडिओल में कुछ विषैलापन नहीं है. हमें आगे बहुत शोध करना है ताकि लोग इसे लेकर उत्साहित हों.’
वैज्ञानिकों ने एक नए शोध में दावा किया है कि स्तनपान कराने से महिलाओं के स्तन कैंसर की चपेट में आने का खतरा कम हो जाता है.

शोध से हुई पुष्टि
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मेलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने पाया कि स्तनपान से एस्ट्रोजन रिसेप्टर (ईआर) और प्रोजेस्ट्रोन रिसेप्टर निगेटिव (पीआर) स्तनकैंसर का खतरा कम हो जाता है.
कई पहलुओं पर किया गया अध्‍ययन
शोधकर्ताओं ने अपने इस शोध के दौरान कई पहलुओं का अध्ययन किया, जिनमें महिला द्वारा पैदा किए गए बच्चों की संख्या और स्तनपान आदि शामिल थे. शोध के नतीजों में पाया गया कि बिना स्तनपान कराए तीन या अधिक बच्चे होने का संबंध ईआर, पीआर निगेटिव स्तनकैंसर के खतरे को बढ़ा देता है. ईआर, पीआर निगेटिव स्तन कैंसर आमतौर पर युवा महिलाओं को होता है और इसका पता बहुत देर में चलता है.स्तन कैंसर का इलाज करा चुकी मोटी महिलाओं में इस बीमारी के दोबारा पनपने की आशंका पतली महिलाओं के मुकाबले 30 प्रतिशत ज्यादा होती है. एक नये अध्ययन में यह दावा किया गया है.

अतिरिक्त चर्बी से महिलाओं में हारमोनल बदलाव ज्यादा होते हैं, जिससे इलाज के बावजूद कैंसर के दोबारा पनपने की आशंका बढ़ जाती है.
 यह माना जाता था कि अधिक वजन वाली महिलाओं में कैंसर के दोबारा पनपने की वजह उन्हें दी जाने वाली कीमोथरेपी की कम खुराक है क्योंकि आम तौर पर कीमोथरेपी की खुराक देते समय मरीज के वजन और शारीरिक आकार के फर्क पर ध्यान नहीं दिया जाता.
न्यूयार्क के अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज आफ मेडिसिन के मोंटेफिओर मेडिकल सेंटर के डा. जोसेफ स्पारानो ने 700 महिला मरीजों पर एक ताजा अध्ययन के बाद कहा, ‘हमने पाया कि मोटापे के कारण महिलाओं में स्तन कैंसर दोबारा होने का जोखिम 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है और इलाज के बावजूद उनके मौत की आशंका भी 50 प्रतिशत अधिक होती है.’


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